हाल ही में भारत सरकार ने 2023-2024 कृषि सीजन के लिए कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है।
MSP: वह दर, जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदती है उसे MSP कहते हैं।
यह किसानों द्वारा किए गए उत्पादन की लागत के कम से कम डेढ़ गुना की गणना पर आधारित होती है। दूसरे शब्दों में MSP किसी भी फसल के लिये एक 'न्यूनतम मूल्य' है, जिसे सरकार किसानों के लिये लाभकारी मानती है और यह वह कीमत भी है, जिसे सरकारी एजेंसियाँ किसानों से किसी विशेष फसल की खरीद करने पर भुगतान करती हैं।
वर्तमान में इन कीमतों के लिये कोई वैधानिक समर्थन नहीं है और न ही उनके प्रवर्तन को अनिवार्य करने वाला कोई कानून है
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MSP के तहत फसलें :
केंद्र सरकार 22 फसलों के लिये 'न्यूनतम समर्थन मूल्य' (MSP) तथा गन्ने के लिये 'उचित और लाभकारी मूल्य' (FRP) की घोषणा करती है, इनमें शामिल हैं-
- 7 अनाज (बाजरा, गेहूँ, मक्का, धान जौ, रागी और ज्चार) ;
- 5 दालें (तूर, चना, मसूर, उड़द और मूंग) ;
- 7 तिलहन (सूरजमुखी, सरसों, नाइगर सीड, सोयाबीन, मूँगफली, तिल और सूरजमुखी) ;
- 4 वाणिज्यिक फसलें (कच्चा जूट, कपास, खोपरा और गन्ना)
सरकार कैसे तय करती है MSP?
सरकार प्रत्येक फसली मौसम (रबी और खरीफ) की शुरुआत में MSP की घोषणा करती है।
सरकार द्वारा 'कृषि लागत और मूल्य आयोग' (CACP) द्वारा की गई सिफारिशों का गहन अध्ययन करने के बाद MSP तय किया जाता है।
कृषि लागत और मूल्य आयोग' (CACP) कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का एक संबद्ध कार्यालय है।
